Tuesday, November 9, 2010

कहो तो फ़िर से..............

1.रुमानियत और मुहब्बत,हैं दो लफ़्ज़ या कुछ और
कहो तो फ़िर से.....
ये बात है या जज्बात,पुरानी ये मुलाकात
कहो तो फ़िर से....
ज़िन्दग़ी जीने का ये ढंग,और सब्र का परचम
पी रहे हो इसे क्यूं..... कहो तो फ़िर से....
वो तुम ही थे जो कहते थे महफ़िल में
प्यार करता हूं...बेपनाह इनसे......
कहो तो फ़िर से.........

2..चेहरा तुम्हारा......
चेहरा तुम्हारा देखकर कहता है आईना
तुम हूर हो,नूर हो या फ़िर परी हो कोई

3..तेरा चेहरा......
तेरा चेहरा गुलाब हो जाए
रुहे-शब आफ़ताब हो जाए
ये आंधिया भी रुक जाएंगी गर
तेरे रुख़ से नकाब हट जाए

4..तेरे करीब...
तेरे क़रीब आके महसूस हुआ यूं
जैसे हसीं वादी,और वादियों में तू

5..तेरे बिन...
अब न रह पाउंगा में तो तेरे बिन
अब न जी पाउंगा में तो तेरे बिन

No comments: