Friday, March 18, 2011

औक़ात.........


ये सब उस कमीनी का किया धरा है,अगर वो न होती तो न मेरी कुर्सी खतरे में होती और न ही कुमार मुझसे निगाहें फेरता....अरे कितना चाहता था वो मुझे....मेरा कितना ख़्याल रखता था तुम्हे तो सब मालूम है। मुझे एंकर बनाने में कितना बड़ा हाथ है उसका शायद तुम नहीं जानती....किस-किस से नहीं लड़ा वो मेरी ख़ातिर लेकिन उस चुड़ैल के आते ही बदल गया वो इसने न जाने क्या जादू कर दिया कुमार पर... वो मेरी तरफ़ देखता तक नहीं....यहां तक कि मुझसे बोल भी नहीं रहा कितना बैचेन हूं मैं आजकल...अरे मुझसे प्यार न करे मगर मुझसे बात तो कर सकता है। एक ही सांस में बोले जा रही थी कुसुम.....देख कुसुम इसमें गलती तेरी भी है....कितना समझा रहा था वो उस दिन मेरे सामने तुझे....अरे तू एंकर है....कोई चव्वनी छाप नहीं....कई बार कुमार ने मुझसे खुद कहा कि समझाओ कुसुम को ये सब बुरा लगता है मुझे....हर किसी से इतना....अरे कोई तो मौरल वैल्यू होनी चाहिए इंसान की ये क्या हर किसी के साथ....बस-बस रहने दे तू भी उसी का फेवर कर रही है....चुप करा दिया रोशनी को....जाओ अपने बुलेटिन पर ध्यान दो टाइम हो रहा है।
      गहरी दोस्ती थी कुसुम और रोशनी में....दोनों ने एक साथ सवेरा चैनल को ज्वाइन किया था। रोशनी की किस्मत अच्छी थी उसे कुछ दिनों बाद ही एंकरिंग का चांस मिल गया,लेकिन कुसुम न्यूज़ डेस्क पर ही काम करती रही। लेकिन फ़िर भी दोनों की दोस्ती बरकरार रही। रोशनी को देख-देख कर कुसुम को भी एंकरिंग करने की चाहत होने लगी...लेकिन काफ़ी कोशिशों के बाद भी उसे चांस नहीं मिल पा रहा था। भले ही वो हर किसी से घुलमिल कर बात करती हो लेकिन उसका यही एट्टीटयूड उसकी राह का रोड़ बन रहा था। रोशनी लगातार बेहतर एंकरिंग कर रही थी,कुसुम न चाहते हुए भी कभी-कभी उससे एंकर बनने की बात कह डालती।
      धीरे-धीरे उसने भी रोशनी की राह पकड़ ली,वीओ करना शुरु कर दिया लेकिन आवाज़ में दम नहीं था। रोशनी से सीख-सीख कर रोजाना वीओ करने लगी। कुछ दिनों बाद उसकी आवाज में थोड़ा सुधार हुआ लेकिन इतना नहीं कि वो वीओ कर सके। और एक दिन तो बवाल मच गया जब एक पैकेज का वीओ कुसुम ने कर डाला एडीटर भड़क गया और उसके वीओ करने पर रोक लग गई। अरमान एक ही झटके में टूट गए....
      लेकिन उसकी किस्मत में शायद एंकर बनना लिखा था,कुमार नाम के एक प्रोग्रामिंग प्रोडयूसर को नया कंसेप्ट सौंपा गया....कुसुम को जैसे ही इस बात की भनक लगी....वो एक्टीव हो गई...आखिर रोशनी को एंकर बनाने में कुमार का ही तो हाथ था....वो इस मौके को खोने नहीं देना चाहती थी....वो कुमार के आगे-पीछे घुमने लगी...हल्का प्यार का इशारा देकर उसने कुमार से बातचीत का सिलसिला काफी बढ़ा लिया...कुमार आप ही मेरा सपना पूरा कर सकते है....मेरी दिली तमन्ना है कि मैं भी एंकर बनूं आप ही बताइए क्या कमी है मुझमें क्या मैं खुबसूरत नहीं हूं....क्या मैं टेलेंटेड नहीं हूं....मुझे एक चांस दे दिजिए....में आपका ये अहसान सारी ज़िंदगी नहीं भूलुंगी....मैं वक्त आने पर आपके लिए अपनी जान भी दे सकती हूं.... उधर कई नई एंकरों के ओडिशन में कुमार ने कुसुम का भी ओडिशन करवा दिया....और इस बात पर जोर दिया कि कुसुम का न्यूज़ सेंस काफी अच्छा है....औऱ हमें नई एंकर की बजाए अपने इनहाउस को प्रमोट करना चाहिए ताकि और लोग भी बेहतर काम कर सकें।
     सर मैं कह रहा हूं न आप मुझपे विश्वास किजिए....मैं ज़िम्मेदारी लेता हूं उसकी....कच्चा घड़ा है सर वो अभी रोशनी को देखिए वो भी तो मेरे ही सामने....ठीक है कुमार लेकिन तुम....कहीं भावनाओं में बहकर या फ़िर कुछ और.....नहीं सर मेरा एसा कुछ नहीं है....रोशनी के बाद मैं चाहता हूं कि कुसुम को भी चांस दिया जाए....नई लड़की है जोश से काम करती हैं...बेहतर कर सकती हैं....पर कुमार...सर मेरे उपर छोड़ दिजिए आप....ठीक है उसका ओडिशन लो और मुझे दिखाओ....जी सर.....देखो अब बाजी तुम्हारे हाथ में है....अगर तुम...पास हो गईं तो.....कुमार मैं तुम्हे कैसे शुक्रिया अदा करुं....शुक्रिया बाद में अदा करना पहले रियाज़ करना शुरु कर दो....रोजाना चार से पांच घंटे तक... मैं तुम्हारी हेल्प करुंगा....कुमार.... मैं चाहती थी कि इस संडे को हम कहीं काफी पीने चलें तो....ठीक है चलते हैं अगर कुछ काम न निकला तो....अब मैं चलता हूं...रियाज़ पर फोकस कर दो..डू एंड डाई....ओके.....सर ये हैं ओडिशन....अच्छा है....इतना भी बुरा नहीं है चल जाएगी....कब से ओपनिंग है प्रोग्राम की....बस सर नेक्ट वीक से... ठीक है....अच्छा करो....
     प्रोग्राम चल निकला....एक फोटो और खींच न यार घर मैं दिखाना.... सबको दिखाना...अरे कुसुम अब तो तुम हमें भाव भी नहीं दोगी...एंकर जो बन गई हो....एक पुराना ईंटर्न चिल्लाया...नहीं यार कैसी बात करते हो तुम... कैसे भुल जाउंगी तुम्हे.....धीरे-धीरे वक्त बीतता गया.....देखो कुसुम तुम्हारी शिकायत आ रही है कि तुम टीपी रीड नहीं करती हो....अपना ध्यान काम की बजाए अपना रुतबा दिखाने में लगी रहती हो....फोटो खिंचवाने का क्या मतलब है...तुम अब एंकर हो...कुछ तो सोचो.....इस तरह सब से मिलना-जुलना ठीक नहीं रोशनी को देखो सीखो कुछ उससे....मिलो लोगों से... लेकिन कुछ फासला तो हो ये क्या कि सबसे.....समझी कुछ.....
     ये सब क्या हो रहा है कुमार इतनी फ़ंबलिंग क्यों जा रही है प्रोग्राम में.....सवाल क्यों नहीं पूछ पाती ये रिपोर्टर से...तुम पीसीआर से सवाल क्यों नहीं बताते उसे.....सर मैं कोशिश करुंगा....देखो बहुत हो गया कुसुम अब सुधर जाओ वरना.....अरे वरना क्या एंकरिंग से हटवा दोगे........ये क्या सुन रहा हूं मैं कुमार... तुम कुसुम से बात नहीं करते हो...किसने कहा...कुसुम आई थी मेरे पास....कह रही थी कि सर मुझसे बात नहीं कर रहे हैं....देखो ये सब नहीं चलेगा यहां... ये सब बाहर करो जो भी करना है....
    सर ये माही हैं.....एंकर हैं.. अब ये ही प्रोग्राम करेंगी....औऱ कुसुम....सर उसे कितना समझाया मैने पर वो मानने को ही तैयार नहीं है.....मैं प्रोग्राम को कचरा बनते देखना नहीं चाहता.....ठीक है जैसे तुम्हारी मर्जी....बेहतर करो....मुझे दवाब न देना पड़े....सर बहुत अच्छा किया आपने कुसुम के साथ यही होना चाहिए था.....घमंडी कहीं की....हालांकि मेरी दोस्त है पर पता नहीं किस इगो में रहती है.....आजकल बैचेनी बढ़ गई है उसकी.....मुझसे तो नज़रें तक नहीं मिला पा रही है....आजकल....खैर छोड़ो....मुझे माही के साथ शूट पर निकलना है फ़िर मिलते हैं.....