Thursday, March 31, 2011

कलमा-ए-तय्यैब पर हो अमल.....


इमामे-हरम के दौरा-ए-हिंदुस्तान को आलमे-इस्लाम के नज़दीक निहायत अक़ीदत व एहतराम दिया गया... इमामे-हरम डा.शेख़ अब्दुल रहमान अस सुदैस के दौरा-ए-हिंद को मुख़्तलिफ़ उमूर की बुनियाद पर हिंदुस्तान में इज़्जत और तौक़ीर की निगाह से देखा गया। अपने क़याम के दौरान हिंद-सउदी ताल्लुकात बेहतर बनाने और हिंदुस्तानी मुसलमानों को वैहदानियत और रिसालत के परचम तले मुत्तहिद वमुअज़्जम रहने और इस्लामी जब्ते-हयात के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारने के जो जरुरी पैग़ामात दिए,इनकी बुनियाद पर बेसाख़्ता ये बात कही जा सकती है कि ये दौरा न सिर्फ़ उन लोगों के लिए जो मेजबानी के फ़राइज़ को अंजाम दे रहे थे या उन मुस्लिम इदारों में जहां भी वे तशरीफ़ ले गए उनके लिए तारीख़ी रहा।
     इमामे-हरम मक्की इससे क़ब्ल भी ज़मीने-हिंद पर तशरीफ़ ला चुके हैं,लेकिन डा.शेख़ अब्दुर रहमान अस सुदैस का ये सफ़र इसलिए भी यादगार और तारीख़ी कहा जाएगा कि इसकी हर-पल ये कोशिश रही कि मसलकी इख़्तलाफ़ात को फरामोश करके कलमा-ए-तैयबा पर इमानो-अक़ीदा रखने वालों को एक ही प्लेटफार्म पर लाकर खड़ा कर दिया जाए और तमाम इख़्तेलाफ़ की दीवारों को मुनहदिम कर दिया जाए। उन्होने जमियत उलेमा,जमियत-एहले-हदीस और जमात इस्लामी जाकर यही पैग़ाम देने की कोशिश की।
     इमामे-हरम ने देवबंद में जाकर भी जियारत की औऱ कई लाख अक़ीदतमंदों को ख़िताब करते हुए इस नतीजे पर पंहुचे कि हिंदुस्तान में अपने मजहबी क़ायदीन के लिए जो जोश और अक़ीदत पायी जाती है,वो कैफ़ियत दुनिया के किसी भी हिस्से में नज़र नहीं आती। इमामे-हरम ने अपने तरजो अमल से मुसलमान-ए-हिंद को जो पैग़ाम देने की कोशिश की है,इसे समझने के लिए मुख़्तलिफ़ मक्तबे फिक्र के उलेमा,क़ारी,अकाबरीन को सर जोड़कर बैठने की ज़रुरत है। और यही वक्त का तक़ाजा है,इस एक नुकाती फार्मुले पर गौर करने की अहम ज़रुरत है....चूंकि अल्लाह एक है और जो पैग़ाम और जैसी ज़िंदगी हमारे हुजूर सल्लाहुअलैयही वसल्लम ने इख़्तयार की वो निहायत ही क़ाबिले दाद है....अल्लाह के रसूल ने अपनी ज़िंदगी में न जाने कितनी तकलीफें बर्दाश्त कीं लेकिन कभी भी हिम्मत नहीं हारी....जिसका नताइज़ है कि आज इस्लाम आलमी दुनिया में अपना परचम लहरा रहा है। इमाम-ए-हरम ने अपने ख़ुतबे में मुसलमानों को जो नसीहतें फराइम की वो भी वाकई काबिले दाद हैं....उनके ख़ुतबे पर हर मुसलमान को इत्तेफ़ाक होना चाहिए क्योंकि आख़िरत की दुनिया में अल्लाह के आगे हमें अपनी दुनियावी ज़िंदगी का हिसाब देना है। सभी इदारों और तंज़ीमों के साथ-साथ मुख़्तलिफ़ अफ़कार और नज़रियात रखने वाली ज़मातें हुकूमत के लिए माज़ी की तल्खियां भुलाकर कम से कम मुश्तरका प्रोग्राम के ज़रिए मंज़िल तक पंहुच सकती है। तो फिर आखिर हम क्यों नहीं....अपने 2 मसलक पर क़ायम होते हुए सिर्फ़ मसायल पर मुत्तहिद क्यों नहीं हो सकते।
    इमामे-हरम के प्रोग्राम इत्तहाद को न सिर्फ़ हिंदुस्तान के तनाज़ुर में बल्कि बर्रे-सग़ीर हिंदो-पाक दुनिया-ए-अरबो-अज़म और बैनुल-अक़वामी सतहों पर हमारी सताइश करते हुए हिंदो-अरब के बेहतर मुस्तक़बिल का इशारा भी किया है।शहर मक्का में हज के दौरान लाखों जायरीन को जो सहुलियात फराइम की जाती है उसमें वहां की हुकूमत की जितनी भी तारीफ़ की जाए वो कम है....अगर यही सिलसिला जारी रहा तो सउदी से मुसलमानों के रिश्ते में मजबूती बरकरार रहेगी। इसी तरह बैनुल-अक़वामी सतह पर उभरने वाली एक बड़ी कुव्वत की हैसियत से हिंदुस्तान को भी सउदी अरब से दैरिना रिश्तों का लिहाज़ रखते हुए इसके तहफ़्फुज और तामीर में अहम किरदार अदा करना होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि इमामे-हरम का ये तारीख़साज़ दौरा सरज़मीने-हिंद को देर तक याद रहेगा,हालांकि अब ये माज़ी का अहम हिस्सा हो चुका है।
     
     

Tuesday, March 29, 2011

उप्स..माई फेवरेट...


बस एक बार मुझे उससे मिलवा दे यार राजू.....क्या जबरदस्त एंकर है भाई...बिल्कुल हिरोइन माफ़िक....बोलती है तो लगती है जैसे फूल झड़ रहे हों....यार मेरा कैसे भी हो अपने चैनल में जुगाड़ करवा दे....तू बहुत लक्की है भाई... कसम से....यार कुछ तो कर...कम से कम उसे देखने का मौका तो मिलता रहेगा...अबे यार कुछ नहीं तू भी फालतू में.....अबे तू इनकी सच्चाई नहीं जानता...बाहर से कुछ अंदर से कुछ....नहीं यार हर कोई एक जैसा नहीं होता....
    राजू और मिलन पक्के दोस्त थे.....मिलन एक चैनल में ड्राइवर था....अक्सर एक दुसरे से मिलते तो एक दूसरे के बारे में बातें किया करते....राजू को मिलन के चैनल में काम करने वाली एंकर तान्या बहुत पसंद थी...जब भी तान्या कोई बुलेटिन करती राजू उसे देखना न भूलता....यूं तो उसके चैनल में भी कई एंकर थीं लेकिन उसे लगता कि तान्या की बात ही कुछ और है....और एक दिन अचानक उसकी किस्मत का दरवाजा खुल गया.....जब उस चैनल में मिलन ने उसे नौकरी पर रखवा दिया....रात काटे नहीं कट रही थी राजू की...रात भर सोचता रहा कि सबसे पहले जाते ही तान्या का दीदार करुंगा....
   अरे राजू तुम शूट पर निकलो जल्दी....ओबी ले जाओ फटाफट... पास के इलाके में जो झुग्गी बस्ती है वहां जबरदस्त आग लग गई है.....इनपुटहेड ने कहा...जी सर..अरे शंभु रुको ज़रा....मैं कुछ सामान भूल आईं अंदर....जी मैडम...अरे ड्राइवर कौन है...राजू है....कौन राजू....जी नया आया है....ओके...चलो....कब तक पहुचेंगें.... मैडम यही कोई दो घंटे में...आगे की सीट पर बैठी तान्या बोली....ओके....पीछे की सीट पर ओबी इंजिनियर और कैमरामैन शंभू बैठे थे....एसी में भी पसीना आ रहा था राजू को....
   नमस्कार...आप देख रहें हैं....और मैं हूं तान्या....इस इलाके में लगी जबरदस्त आग ने एक बार फिर से प्रशासन की पोल खोल दी है....लगातार लाइव दे रही थी तान्या....दूर से ओबी में बैठा राजू उसे एकटक निहार रहा था....ये जली लाशें बतला रही हैं कि कितना दर्दनाक मंज़र रहा होगा यहां...चेहरे पर ग़म लिए लगातार एंकरिंग कर रही थी तान्या....यार अंदर से भी कितनी अच्छी है ये....कितना ग़म महसूस कर रही है....अंदर ही अंदर सोच रहा था राजू...तभी अचानक...चलो यार हो गया....ये सब फालतू का है....आग लग गई...ये हो गया वो हो गया....ये सब गरीबो के धंधें हैं...हमें क्या...इनको खुद ही अपनी ज़िंदगी जीना नहीं आता....कीड़े-मकोड़ों की तरह रहते हैं....कितनी बदबू है यहां अगर कुछ देर और रुकी तो बेहोश हो जाउंगी....
    राजू को लगा जैसे किसी ने उसके सीने में ख़ंजर उतार दिया हो....परदे पर मासुमियत दिखाने वाली इतनी पत्थरदिल होगी उसे मालूम नहीं था....नफ़रत हो रही थी उसे उसके पास बैठने से....इतनी तेजी से गाड़ी दौड़ा रहा था कि तान्या भी डर गई....अरे ये क्या पागल हो क्या तुम...कैसे गाड़ी चला रहे हो....लग गया न डर मैडम...क्या मतलब...मतलब ये कि हम ग़रीबों को मरने से भी डर नहीं लगता आखिर हमारे पास जीने के लिए होता ही क्या है....क्या बकवास कर रहे हो तुम....बकवास...मैं बकवास कर रहा हूं...बकवास तो आप जैसे लोग करतो हो दिनभर....बेवकुफ़ बनाते हो लोगों को....तुम्हारा कोई इमान-धर्म नहीं...चकाचौंध की ज़िदगी में तुम इंसानियत तक को भूल जाते हो...तुम आफिस चलो अगर तुम्हे नौकरी से न निकलवा दिया तो मेरा नाम....अरे छोड़ो मैडम आप क्या निकलवाओगी हम खुद ही छोड़ देंगे ये नौकरी....ऐसी जगह काम नहीं करना जहां....तुम जैसे लोग रहते हों....

Friday, March 18, 2011

औक़ात.........


ये सब उस कमीनी का किया धरा है,अगर वो न होती तो न मेरी कुर्सी खतरे में होती और न ही कुमार मुझसे निगाहें फेरता....अरे कितना चाहता था वो मुझे....मेरा कितना ख़्याल रखता था तुम्हे तो सब मालूम है। मुझे एंकर बनाने में कितना बड़ा हाथ है उसका शायद तुम नहीं जानती....किस-किस से नहीं लड़ा वो मेरी ख़ातिर लेकिन उस चुड़ैल के आते ही बदल गया वो इसने न जाने क्या जादू कर दिया कुमार पर... वो मेरी तरफ़ देखता तक नहीं....यहां तक कि मुझसे बोल भी नहीं रहा कितना बैचेन हूं मैं आजकल...अरे मुझसे प्यार न करे मगर मुझसे बात तो कर सकता है। एक ही सांस में बोले जा रही थी कुसुम.....देख कुसुम इसमें गलती तेरी भी है....कितना समझा रहा था वो उस दिन मेरे सामने तुझे....अरे तू एंकर है....कोई चव्वनी छाप नहीं....कई बार कुमार ने मुझसे खुद कहा कि समझाओ कुसुम को ये सब बुरा लगता है मुझे....हर किसी से इतना....अरे कोई तो मौरल वैल्यू होनी चाहिए इंसान की ये क्या हर किसी के साथ....बस-बस रहने दे तू भी उसी का फेवर कर रही है....चुप करा दिया रोशनी को....जाओ अपने बुलेटिन पर ध्यान दो टाइम हो रहा है।
      गहरी दोस्ती थी कुसुम और रोशनी में....दोनों ने एक साथ सवेरा चैनल को ज्वाइन किया था। रोशनी की किस्मत अच्छी थी उसे कुछ दिनों बाद ही एंकरिंग का चांस मिल गया,लेकिन कुसुम न्यूज़ डेस्क पर ही काम करती रही। लेकिन फ़िर भी दोनों की दोस्ती बरकरार रही। रोशनी को देख-देख कर कुसुम को भी एंकरिंग करने की चाहत होने लगी...लेकिन काफ़ी कोशिशों के बाद भी उसे चांस नहीं मिल पा रहा था। भले ही वो हर किसी से घुलमिल कर बात करती हो लेकिन उसका यही एट्टीटयूड उसकी राह का रोड़ बन रहा था। रोशनी लगातार बेहतर एंकरिंग कर रही थी,कुसुम न चाहते हुए भी कभी-कभी उससे एंकर बनने की बात कह डालती।
      धीरे-धीरे उसने भी रोशनी की राह पकड़ ली,वीओ करना शुरु कर दिया लेकिन आवाज़ में दम नहीं था। रोशनी से सीख-सीख कर रोजाना वीओ करने लगी। कुछ दिनों बाद उसकी आवाज में थोड़ा सुधार हुआ लेकिन इतना नहीं कि वो वीओ कर सके। और एक दिन तो बवाल मच गया जब एक पैकेज का वीओ कुसुम ने कर डाला एडीटर भड़क गया और उसके वीओ करने पर रोक लग गई। अरमान एक ही झटके में टूट गए....
      लेकिन उसकी किस्मत में शायद एंकर बनना लिखा था,कुमार नाम के एक प्रोग्रामिंग प्रोडयूसर को नया कंसेप्ट सौंपा गया....कुसुम को जैसे ही इस बात की भनक लगी....वो एक्टीव हो गई...आखिर रोशनी को एंकर बनाने में कुमार का ही तो हाथ था....वो इस मौके को खोने नहीं देना चाहती थी....वो कुमार के आगे-पीछे घुमने लगी...हल्का प्यार का इशारा देकर उसने कुमार से बातचीत का सिलसिला काफी बढ़ा लिया...कुमार आप ही मेरा सपना पूरा कर सकते है....मेरी दिली तमन्ना है कि मैं भी एंकर बनूं आप ही बताइए क्या कमी है मुझमें क्या मैं खुबसूरत नहीं हूं....क्या मैं टेलेंटेड नहीं हूं....मुझे एक चांस दे दिजिए....में आपका ये अहसान सारी ज़िंदगी नहीं भूलुंगी....मैं वक्त आने पर आपके लिए अपनी जान भी दे सकती हूं.... उधर कई नई एंकरों के ओडिशन में कुमार ने कुसुम का भी ओडिशन करवा दिया....और इस बात पर जोर दिया कि कुसुम का न्यूज़ सेंस काफी अच्छा है....औऱ हमें नई एंकर की बजाए अपने इनहाउस को प्रमोट करना चाहिए ताकि और लोग भी बेहतर काम कर सकें।
     सर मैं कह रहा हूं न आप मुझपे विश्वास किजिए....मैं ज़िम्मेदारी लेता हूं उसकी....कच्चा घड़ा है सर वो अभी रोशनी को देखिए वो भी तो मेरे ही सामने....ठीक है कुमार लेकिन तुम....कहीं भावनाओं में बहकर या फ़िर कुछ और.....नहीं सर मेरा एसा कुछ नहीं है....रोशनी के बाद मैं चाहता हूं कि कुसुम को भी चांस दिया जाए....नई लड़की है जोश से काम करती हैं...बेहतर कर सकती हैं....पर कुमार...सर मेरे उपर छोड़ दिजिए आप....ठीक है उसका ओडिशन लो और मुझे दिखाओ....जी सर.....देखो अब बाजी तुम्हारे हाथ में है....अगर तुम...पास हो गईं तो.....कुमार मैं तुम्हे कैसे शुक्रिया अदा करुं....शुक्रिया बाद में अदा करना पहले रियाज़ करना शुरु कर दो....रोजाना चार से पांच घंटे तक... मैं तुम्हारी हेल्प करुंगा....कुमार.... मैं चाहती थी कि इस संडे को हम कहीं काफी पीने चलें तो....ठीक है चलते हैं अगर कुछ काम न निकला तो....अब मैं चलता हूं...रियाज़ पर फोकस कर दो..डू एंड डाई....ओके.....सर ये हैं ओडिशन....अच्छा है....इतना भी बुरा नहीं है चल जाएगी....कब से ओपनिंग है प्रोग्राम की....बस सर नेक्ट वीक से... ठीक है....अच्छा करो....
     प्रोग्राम चल निकला....एक फोटो और खींच न यार घर मैं दिखाना.... सबको दिखाना...अरे कुसुम अब तो तुम हमें भाव भी नहीं दोगी...एंकर जो बन गई हो....एक पुराना ईंटर्न चिल्लाया...नहीं यार कैसी बात करते हो तुम... कैसे भुल जाउंगी तुम्हे.....धीरे-धीरे वक्त बीतता गया.....देखो कुसुम तुम्हारी शिकायत आ रही है कि तुम टीपी रीड नहीं करती हो....अपना ध्यान काम की बजाए अपना रुतबा दिखाने में लगी रहती हो....फोटो खिंचवाने का क्या मतलब है...तुम अब एंकर हो...कुछ तो सोचो.....इस तरह सब से मिलना-जुलना ठीक नहीं रोशनी को देखो सीखो कुछ उससे....मिलो लोगों से... लेकिन कुछ फासला तो हो ये क्या कि सबसे.....समझी कुछ.....
     ये सब क्या हो रहा है कुमार इतनी फ़ंबलिंग क्यों जा रही है प्रोग्राम में.....सवाल क्यों नहीं पूछ पाती ये रिपोर्टर से...तुम पीसीआर से सवाल क्यों नहीं बताते उसे.....सर मैं कोशिश करुंगा....देखो बहुत हो गया कुसुम अब सुधर जाओ वरना.....अरे वरना क्या एंकरिंग से हटवा दोगे........ये क्या सुन रहा हूं मैं कुमार... तुम कुसुम से बात नहीं करते हो...किसने कहा...कुसुम आई थी मेरे पास....कह रही थी कि सर मुझसे बात नहीं कर रहे हैं....देखो ये सब नहीं चलेगा यहां... ये सब बाहर करो जो भी करना है....
    सर ये माही हैं.....एंकर हैं.. अब ये ही प्रोग्राम करेंगी....औऱ कुसुम....सर उसे कितना समझाया मैने पर वो मानने को ही तैयार नहीं है.....मैं प्रोग्राम को कचरा बनते देखना नहीं चाहता.....ठीक है जैसे तुम्हारी मर्जी....बेहतर करो....मुझे दवाब न देना पड़े....सर बहुत अच्छा किया आपने कुसुम के साथ यही होना चाहिए था.....घमंडी कहीं की....हालांकि मेरी दोस्त है पर पता नहीं किस इगो में रहती है.....आजकल बैचेनी बढ़ गई है उसकी.....मुझसे तो नज़रें तक नहीं मिला पा रही है....आजकल....खैर छोड़ो....मुझे माही के साथ शूट पर निकलना है फ़िर मिलते हैं.....  

Tuesday, March 15, 2011

मां.....


हो दुनिया पराई तो कुछ ग़म नहीं
इस दौलतो-शोहरत में कुछ दम नहीं
अगर कुछ ज़मीं पर है अनमोल
वो मां है....मां है...सिर्फ़ मां है...
एक तस्वीर धुंधली, मैली सी चादर
सिमटा है उसमें मेरी मां का आंचल
वो बचपन की यादें, वो बेपरवाह लम्हे
दरख़्तों के पत्ते,पुराना सा आंगन
वो गांव की यादें,वो पैदल के रस्ते
निकलते थे जब हम अपने घर से
मेरी मां की उंगली हाथों में होती
वो ऐसे मुझे ले के चलती थी जैसे
ख़्वाबों की उसके तामीर हूं जैसे
जो बदला ये मौसम,बदला सफ़र है
मैं हूं इस शहर मैं वो तन्हा मग़र है
है अब भी अजब सी कशिश मेरे दिल में
मेरी मां के जैसा कोई भी नहीं है...

Monday, March 14, 2011

तस्वीर....


नज़र-नज़र में फ़र्क होता है...
यूं हीं नहीं हर कोई बदगुमां होता है।
तुझे एहसास हो तो मिल शायद...
देखना कौन क्या पाता और क्या खोता है।
तेरी तस्वीर मुक्ममल थी मेरे सीने में
मेरे ज़ख्मों पे अब भी कोई हंसता है।

उम्र यूं हीं गुज़ार दी उसने
कभी हंसता तो कभी रोता है।

ग़मों की आंधियों में वो बह न जाए
यही सोचके मेरा दम निकलता है।

वो बात करता है तो,फूल जैसे झड़ते हैं
तेरे एहसास ने ही उसको ज़िंदा रखा है।

कोई जो आए इस पहलू में आलम
मेरे हमदम ने उसे संभाल रखा है।

Sunday, March 13, 2011

तड़प...


यक़ीनन तड़प तेरे सीने में भी होगी
मुझसे बिछड़ जाने की....
यूं ही तो कोई जाम नहीं छलकता
य़ूं ही तो कोई पैमाना नहीं झलकता।
गुजिश्ता कुछ दिनों से तुम सो नहीं पायीं
मेरी आवारगी और अपनी तन्हाई में।
सोचते-सोचते रात कब काट लेती हो
तुम्हे इसका इल्म हो न हो पर मुझे तो है।
मुझे मालुम है तुम्हारी सारी बेचारगियां
आख़िर तुम किस-किस से लड़ती।
और वो कमबख़्त वक्त ही ऐसा था जब
तुमने और हमने अपनाई अलग-अलग राहें।
ख़ैर,कोई बात नहीं खुशी तो है इस बात की है
कि तुम ज़िंदा हो यक़ीनन मेरे दिल में हमेशा के लिए....


Friday, March 11, 2011

शार्टकट....


क्या बकवास कर रही हो तुम....मुझे ऐसी बातें बिल्कुल भी पसंद नहीं हैं....तुम इतना गिर सकती हो मैने कभी सपने में भी नहीं सोचा था....क्यों.. क्या सपने देखना ही बंद कर दिए है तुमने...और हां... ज़ाहिर सी बात है अब तुम एंकर तो हो नहीं जो बड़े-बड़े सपने देखो वापस अपनी जगह आ गए....जहां थे वहीं पंहुच गए एक ही झटके में...तो क्या हुआ...ज़िंदगी खत्म तो नहीं हुई....फ़िर से ट्राई करुंगा...और बेहतर करने की कोशिश करुंगा….अरे कब तक...ट्राई करते फिरोगे...मुझे देखो एक ही झटके में कहां से कहां पंहुच गईं...और सुनो कैरियर की ख़ातिर मैं कुछ भी कर सकती हूं..कुछ भी....साइड प्लीज़....
    तिलमिलाकर रह गया मानस....किनारे की कुर्सी पर धम्म से जा बैठा....दोनों हाथों से अपना सिर पकड़े उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि टीना कैरियर की खातिर अपना सबकुछ दांव पर लगा देगी...दोनों ने साथ-साथ मिडिया कोर्स किया था....एक दूसरे को चाहते भी थे दोनों.... इंटर्न से शुरुआत करके धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे...मानस काफ़ी टेलेंटेड था...जो भी काम करता परफेक्ट करता....ऐसा कि लोग कहते कि बंदा बहुत आगे जाएगा...जबरदस्त जर्नलिस्ट बनेगा एक दिन....अपने बेहतरीन लुक और दिलकश आवाज़ की बदौलत चैनल में जल्द ही उसके एंकर बनने की सुगबुगाहट शुरु हो गई थी....जो भी उससे मिलता कहता अरे यार तुम एंकरिंग में ट्राई करो काफ़ी अच्छा कर सकते हो तुम...जी कोशिश कर रहा हूं....
    किस्मत ने जल्द ही मानस का साथ दिया...चैनल में नए एडीटर की इंट्री हुई....पहली ही नज़र में भा गया मानस....जिसके पास भी यूनिक आयडिया हो मेरे पास लेकर आए...मैं कुछ नए और बेहतर प्रोग्राम बनाना चाहता हूं....सबको चांस देना चाहता हूं....चैनल को आगे बढाने के लिए आपको तैयार हो जाना चाहिए....पुराना ढकोसला बिल्कुल नहीं चलेगा.....आई विल्ल चेंज एवरीथिंग....अंडरस्टेंड....किसी को भी डरने की कोई ज़रुरत नहीं सीधा मेरे केबिन में आकर मुझसे बात करे...नए आयडिया देने वालों को प्रमोट किया जाएगा....
    मानस....जी...किसने रखा तुम्हारा नाम...जी मेरी नानी ने....गुड....क्या करते हो....जी न्यूज़ डेस्क पर हूं.....आयडिया अच्छा है....और यूनिक भी....कब से काम कर सकते हो...जी जल्द ही....गुड...देखो मानस....अगर तुमने अच्छा काम करके दिखा दिया तो तुम बहुत आगे जाओगे....थैंक्यू सर....फ़िर जुट जाओ...और सुनो जिसे चाहो अपने साथ ले सकते हो... बोलो...जी...रोहित और टीना....बुलाओ....रोहित और टीना आप लोग तीनों...इस प्रोग्राम को संभालोगे....ओके सर....
   कड़ी मेहनत से प्रोग्राम चल निकला ऐसा कि इसकी गुंज पूरे चैनल में गुंजने लगी....टीआरपी में भी शामिल हो गय़ा प्रोग्राम....आउटपुट,इनपुट,प्रोग्रामिंग प्राडयूसर और सब-एडीटर की मीटिंग में.....टीना को भी चांस दे सकते हैं लुक काफ़ी अच्छा है उसका....नहीं सर मुझे नहीं लगता कि उसको न्यूज़ सेंस होगा....मैने ही उसका इंटरव्यू लिया था जब वो इंटर्न के लिए आई थी....उसे चांस नहीं दिया जा सकता....आउटपुट हेड रंजन बोला....उसके साथ दूसरे भी एक सुर में बोले....मानस.....जी मानस बेहतर कर सकता है....लेकिन ये सब आप पर डिपेंड करता है....और फ़िर मिटिंग में...देखो मानस में तुम्हे एक और ज़िम्मेदारी सौंप रहा हूं....इस प्रोग्राम की एंकरिंग भी तुम्हे करनी होगी ताकि प्रोडयूसर होने के नाते तुम बेहतर कर सको....चीज़ों को निकाल सको....जी सर...थैंक्यू....थैंक्यू वैरी मच....यस....कैबिन से बाहर निकल कर मुठ्ठी भींच कर एक साथ दस सिढ़ियां कूद गया मानस....
    शुरु हो गई एंकरिंग....कुछ दिनों बाद....मानस मजा नहीं आ रहा है....सर मैं क्या कर सकता हूं....मुझे एंकरिंग की प्रैक्टिस के लिए वक्त ही नहीं मिलता...पूरा दिन प्रोग्राम में लगा रहता हूं...कम-से-कम कुछ वक्त मिल जाए तो....ठीक है...कल मीटिंग में तय हुआ है कि तुम और टीना एक साथ एंकरिंग करोगे....ओके सर नो प्रोब्लम....
    और एक दिन....मानस तुम बहुत ज्यादा फ़ंबलिंग करते हो...ये सब नहीं चलेगा....तुम्हे कुछ दिन एकंरिंग से हटाया जा रहा है....फिलहाल तुम अपना पूरा ध्यान प्रोडक्शन पर दो ....उसके बाद तुम फ़िर से तैयार होकर वापसी करना मेरे ब्वाय....ओके सर....मायुस हो गया....मानस....यार मुझसे ज्यादा तो टीना फंबलिंग करती है....फ़िर...उसे क्यू नहीं.... रात भर सोचता रहा मानस...या इलाही ये माज़रा क्या है...कहीं आउटपुट हेड..तो नहीं है इसके पीछे...उसे शायद लगता हो कि ज़िंदगी घुसड़ गई...कलम चलाते-चलाते और कल का छोकरा एंकर बन गय़ा...लेकिन उसने तो खुद मुझे रिकमेंड किया था...आखिर चक्कर क्या है.... और फ़िर सर दस दिन पूरे हो गए....तो क्या... रुख़े लहजे में बोला एडीटर....देखो अब तुम एंकरिंग नहीं करोगे पूरा ध्यान प्रोडक्शन पर ही लगाओ....समझे....
     यार रोहित ये टीना मुझसे सीधे मुंह बात क्यों नहीं कर रही...कहीं न कहीं कुछ तो दाल में काला है....शक सही साबित हुआ....और एक सच ऐसा भी जिसे सुनकर उसके पांव तले ज़मीन खिसक गई....क्या कह रहे हो रोहित वो ऐसा कैसे कर सतती है....यार कैरियर की ख़ातिर कुछ भी कर गुजरेगी वो.... रोहित एक सुर में बताता चला गया कि कैसे वो रंजन से होते हुए आगे तक पंहुची...एक दिन जब तुम एडीटिंग में थे तो रंजन से उसने कहा कि सर मैं कुछ भी कर सकती हूं....कुछ भी बस आप एक मौका दिलवा दिजिए....कुटिल मुस्कान बिखेरते हुए चला गया था रंजन उस दिन और दो दिन बाद ही उसे....तू सही कह रहा है मेरे दोस्त....मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा है....में ही कुछ करता हूं....
    टीना मुझे तुमसे कुछ बात करनी है....हां बोलो....क्या ये सच है कि तुमने मुझे रास्ते से हटाने के लिए ये सब....हां तो क्या....यही तो पालिसी है....आगे बढ़ने की...और सुनो मेरी तरक्की की राह में जो भी आयेगा उसे मैं....जाते हुए पीछे से देखता रह गया मानस....कोई इतना भी गिर सकता है....
    सर ये मेरा रिजाइन है...कितना भरोसा करता था मैं आप पर....पर आप...क्या सिर्फ़ लड़कियां ही....क्या मतलब है तुम्हारा....मतलब ये कि अगर लड़कियां समझौता कर लें तो उन्हे टाप पर पंहुचाने में आफ जैसे लोग कोई कमी नहीं छोड़ते आखिर क्या ख़ता है मेरी....छह महीने हो गए हैं मुझे एंकरिंग से हटाए हुए क्या मैं अबतक इंप्रुव नहीं कर पाता जवाब दिजिए....क्या टीना में आप कोई बदलाव ला पाए नहीं न....किसी की मेहनत को क्यों नहीं देखते आप एक ही चश्मे से सभी को देखना चाहिए....लेकिन मैं हार नहीं मानुंगा.....एक दिन दिखा दुंगा सबको कि मैं क्या हूं....मेरे इरादों के नहीं रोक सकते आप जैसे लोग....ठंडी सांस भरकर निकल पड़ा मानस अपनी नई मंज़िल की तलाश में.....